धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
O Lord, Purari, you saved all Deities and mankind by defeating and destroying the demons Tripurasur. You blessed your devotee Bhagirath and he was in a position to accomplish his Vow following arduous penance.
मैना मातु की हवे दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई more info हो अधिकारी। shiv chalisa in hindi पाठ करे सो पावन हारी॥
ब्रह्मा विष्णु सदा शिव अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव…॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
अथ श्री बृहस्पतिवार व्रत कथा
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
लिङ्गाष्टकम्